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कांग्रेस से यूपी में दूर होता सवर्ण जनाधार ! ________

18-07-2021 10:12:14 AM


प्रियंका गांधी ने कांग्रेस को उत्तर प्रदेश में उबारने के लिए हर मुमकिन विकल्प की ओर देखना शुरू कर तो दिया है किन्तु उनकी राजनीतिक समझ या तो कमजोर है या तो उन्होंने एकदिशिय अभियान पकड़ा हुआ है । ब्लॉक प्रमुख चुनाव में लखीमपुर में महिला प्रस्तावक अनीता यादव के साथ अभद्रता हुआ जिसे किसी अन्य पार्टी ने कोई तरजीह नहीं दी क्योंकि सबको पता था कि ये सब सोचा समझा प्लान था किन्तु कांग्रेस में कोई समझने वाला नहीं था और दलित राजनीति के नाम पर प्रियंका पहुंच गई लखीमपुर अनीता यादव के घर और ना सिर्फ उन्हे गले लगाया बल्कि ये दिखाने का भरपूर प्रयास किया कि वो दलितों की मशिहा है । मैडम वाड्रा ये भूल गई कि उत्तर प्रदेश में दलित राजनीति में सभी पार्टियों की हिस्सेदारी है किन्तु सवर्ण राजनीति में केवल भाजपा एक छत्र राज्य कर रही । सवर्ण वोटरों को जोड़ने की जगह कांग्रेस वहीं अपना पुराना सत्तर वर्ष पूर्व रणनीति दलित जोड़ो अभियान पर चल रही जिसका उत्तर प्रदेश में कोई फायदा नहीं होने वाला । प्रियंका गांधी ये भूल चुकी है कि सवर्ण जातियों के वोटर कभी उनके मूल वोटर और कार्यकर्ता हुआ करते थे जो अब कांग्रेस पार्टी एवं संगठन से उचित दूरी बना चुके है जिसका कारण बिल्कुल स्पष्ट है वो ये कि कांग्रेस ने खुद को दलितों और अल्पसंख्यकों की पार्टी जताना शुरू कर दिया है । यही कांग्रेस के राजनीतिक पतन का कारण भी है ।
                        प्रियंका गांधी की उत्तर प्रदेश में यू दलित प्रेम में उछल कुंद से कांग्रेस को कुछ हासिल नहीं होगा उल्टे प्रियंका गांधी सवर्ण वोटरों से दूर होती जाएगी । कांग्रेस के तुष्टिकरण वाली राजनीति आज तक किसी राजनीतिक समीक्षक के पल्ले नहीं पड़ी । कांग्रेस उत्तर प्रदेश में जो राजनीति करती है वो खुद कांग्रेस के थिंक टैंक के भी समझ से बाहर होगी । पहले हाथरस घटना में बेवजह इन्वॉल्व होना जिसका परिणाम रहा अमेठी जैसे मजबूत गढ़ भी ढह गया क्युकी सवर्ण नाराज हुए और अब उस महिला के घर जाना बड़ा बेतुका है , जिसके वस्त्रों को अभी हाल के जिला पंचायत चुनावों में खींचकर कुछ मनबढ़ो ने उक्त महिला को नामांकन करने से रोकने का प्रयास किया था । कांग्रेस की दिक्कत यही रही है कि वो अपने मूल वोटर सवर्णों को छोड़ती गई जबकि अन्य पार्टियों के लिए अच्छी बात ये रही कि यही सवर्ण वोटर उनके लिए तुरुप का इक्का साबित हुए । आज दलित राजनीति पर उतरी प्रियंका गांधी और उत्तर प्रदेश कांग्रेस को मै अपने कलम से बस ये सलाह देना चाहूंगा कि उत्तर प्रदेश जैसे जातिवादी राज्य में अगर संगठन को खड़ा करना या मजबूत करना है तो दलित और अल्पसंख्यक  राजनीति से तत्काल किनारा कर अपने बेसिक वोटरों को पार्टी से जोड़ा जाए । यू पी में वैसे भी सभी पार्टियां दलित और अल्पसंख्यकों के पीछे ही भागती है इसीलिए सवर्ण वोटर जो कि साइलेंट वोटर कहे जाते है किसी ना किसी पार्टी के साथ होकर उसे सत्ता में मजबूत कर देते है । 32 वर्षों से कांग्रेस यूपी में सरकार में नही है,कारण हम सभी जानते है । ये भी  सभी जानते हैं कि कांग्रेस वर्ष 2000 के बाद से राज्य में सवर्ण वोटरों को भूल चुकी है । बची खुची कांग्रेस की कमर दिग्विजय सिंह और रणदीप सुरजेवाला जैसे हिन्दू विरोधी नेता तोड़ देते है। मेरी नजर में इन दोनों नेताओं ने कांग्रेस को सबसे अधिक नुकसान पहुंचाया है । 
                     खैर बात करे उत्तर प्रदेश की राजनीति की तो वर्तमान कांग्रेस अध्यक्ष लल्लू जी नेता कम नौटंकी ज्यादा दिखते है । जमीनी नेता दिखने के चक्कर में कांग्रेस की किरकिरी करवाना कहा तक जायज है ये तमकुही विधानसभा वाले बेहतर बता सकते है । मै अजय कुमार लल्लू जी को कांग्रेस उत्तर प्रदेश अध्यक्ष के रूप में बहुत उपयुक्त व्यक्ति नहीं मानता । कांग्रेस इन 32 सालों में उठ क्यों नही पाई यह भी सभी कांग्रेसी जानते हैं! जबसे प्रियंका ने यूपी की कमान सम्भाली है तबसे पार्टी कार्यकर्ताओं में जोश सातवें आसमान पर है,पर चापलूसी 32वें आसमान पर है ! 32 सालों का सूखा मिटाने का सही समय प्रियंका के नेतृत्व में जब आया तो जिलाध्यक्षों के आपसी रार ने सब मटियामेट कर दिया है । वाराणसी समेत अन्य जिलों के जिलाध्यक्ष मेरी नजर में चापलूसी की मिशाल है जिनमे केवल परिवारवाद और पैसे कमाने की ललक है ,संगठन के मजबूती से उनको कोई वस्ता नहीं ऐसे में इनकी छटनी सबसे पहले करने पर विचार करना चाहिए । कांग्रेस को अभी से आत्ममंथन करना चाहिए कि 2022 में हमारा प्रदर्शन कैसा रहेगा? यह भी सब जानते है कि कांग्रेस मुस्लिम समुदाय के लिए कुछ ज्यादा मेहरबान रही है इसलिए हिन्दू समुदाय लगातार दूरी बनाए हुए है ,जो जुड़े भी है वो केवल अपने खाने पीने के लिए ।  मजे की बात तो  यह है कि 2022 का परिणाम हमारे पक्ष में रहेगा या नही इसका जवाब कोई कांग्रेसी नहीं देता ।  यह बात तो और बेहतर तरीके से सभी जानते हैं कि केवल मोदी विरोध में कांग्रेस ने जनता को ही दुश्मन बना लिया है ।
                   अब जब सब परिणाम जानते ही हैं तो वह और बेहतरीन व आशा के अनुरूप  हो इसके लिए ऐसा क्या करें यह अब प्रियंका जी को तय करना चाहिए । अगर  सभी इतना कुछ जानते हैं तो फिर उठ क्यों नही पाए, ये कौन जानेगा?निश्चित ही इसे आपको जानना होगा! हमारे समीक्षा  से कुछ नहीं होने वाला! और इसे आप हम सभी से भी बेहतर समझते  हैं, इसमें कोई शक नहीं! आपके जानने का मतलब है यूपी में कांग्रेस की वापसी ।भीड़ और नाकामी गलबहियां कर लें इससे बेहतर है आप सब सचेत हो जाए । एअरपोर्ट,सड़कों,सार्वजनिक स्थलों और पार्टी कार्यालय के बाहर जमा कार्यकर्ता जो कोई पदाधिकारी नहीं, आपके लिए पलक बिछाए खड़ा है! यह वह कार्यकर्ता हैं जिन्हें 32 साल का सूखा भी नही डिगा पाया है! यकीन मानिए कांग्रेस से दूर यूपी की सियायत के 32 साल की सियाह रातें भी इन कार्यकर्ताओं के उत्साह को कम नही कर पायीं हैं पर ये वो खामोश  सवर्ण कार्यकर्ता है जिन्हे कांग्रेस ने कभी तरजीह नहीं दिया । उन्हें जिस दिन का इंतजार था वह प्रियंका के  यहाँ होने से पूरा हो सकता है, पर असल मकसद तब पूरा होगा जब 2022 और फिर 2024 में सब मिलकर पार्टी के लिए नई गौरवगाथा का आगाज करेंगे ! आपको जानना होगा, मन मे चल रहे भाव यथा भीड़ और नाकामी के अंतर्द्वंद को समझना होगा! हमें अपने आप से जीतना होगा! अब नहीं समझे तो देर हो जाएगी! पूर्ण विश्वास है आप यह देर होने नही देंगी! यूपी में कांग्रेस की नई सुबह सिर्फ और सिर्फ सवर्ण नेतृत्व में  ही  सम्भव है!
              


--- पंकज कुमार मिश्रा 
एडिटोरियल कॉलमिस्ट 
शिक्षक एवं पत्रकार


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