परमवीर चक्र वीर अब्दुल हमीद

01-07-2020 01:51:48 PM


1965 में पाकिस्‍तान ने भारत में अस्थिरता पैदा करने की कोशिशों के मद्देनजर ऑपरेशन जिब्राल्टर की शुरुआत की थी। इसके तहत पाकिस्तानी सेना ने जम्मू-कश्मीर में घुसपैठ और हमला करने के साथ-साथ दूसरे मोर्चों पर भी भारत को घेरने की योजना बनाई थी। इस दौरान पकड़े गए पाकिस्‍तान के घुसपैठियों से इस बात का खुलासा हुआ था कि कश्मीर पर कब्जा करने की मंशा से पाकिस्‍तान 30 हजार जवानों को गुरिल्‍ला वार का प्रशिक्षण दिया है। 8 सितंबर 1965 को पाकिस्‍तान ने खेमकरण सेक्‍टर के उसल उताड़ गांव पर जबरदस्‍त हमला किया। उनके साथ पैदल सेना के साथ पैटन टैंक भी थे। वहीं भारतीय जवानों के पास उनसे मुकाबले के लिए थ्री नॉट थ्री रायफल और एलएमजी ही थीं।    उन्‍होने अकेले अपने ही दम पर 1965 में खेमकरण सेक्‍टर के उसल उताड़ गांव में पाकिस्‍तान से हुए युद्ध में उसके सात पैटन टैंकों को उड़ा दिया था। इससे पहले इन पैटन टैंकों को अजय समझा जाता था। पाकिस्‍तान सेना की तरफ से शामिल इन टैंकों के आगे भारतीय सेना बेहद कमजोर थी। इन टैंकों से भारत की पैदल सेना का मुकाबला बेहद मुश्किल था और हर मोड़ पर इनसे निकलने वाले गोले भारतीय सेना पर घातक प्रहार कर रहे थे। ऐसे में अब्‍दुल हामिद ने अपनी गन माउंटेड जीप से एक-एक कर सात टैंकों पर सटीक निशाना लगाकर पाकिस्‍तान की आर्टिलरी के पांव उखाड़ दिए थे। उनको निशाना बनाकर कई हमले किए गए। इनमें जीप पर सवार उनके अन्‍य साथी मारे गए लेकिन हामिद ने हिम्‍मत नहीं हारी। वे लगातार अपनी पॉजीशन बदलते रहे और घायल होने के बावजूद अचूक निशाने से पैटन टैंकों की कब्र खोदते चले गए।


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